बुधवार, 7 मई 2008

मिर्गी

सब लोगों को मिर्गी के बारे में खास-खास और सच्ची बातें जानना चाहिये । क्योंकि यब बीमारी बहुत से लोगों को होती है किसी को भी हो सकती हैतथा इसका इलाज हो सकता है । मिर्गी के बारे में सही जानकारी हासिल करके हम मरीजों का भला कर सकते हैं । सुनी सुनाई अधकचरी, पुराने जमाने की बातों पर भरोसा मत करिये ।मिर्गी उस अवस्था का नाम है जिसमें व्यक्ति को कभी-कभी दौरे आ सकते हैं । बाकी समय वह ठीक रहता है । इन दौरों में तरह-तरह के लक्षण होते हैं, जैसे कि बेहोशी आना, गिर पडना, हाथ-पांव में झटके आना । मिर्गी किसी एक बीमारी का नाम नहीं है । अनेक बीमारियों में मिर्गी जैसे दौरे आ सकते हैं । मिर्गी के सभी मरीज एक जैसे नहीं होते । किसी की बीमारी मद्धिम होते है, किसी की तेज । मिर्गी एक आम बीमारी है । लगभग सौ लोगों में से एक को होती है । इनमें से आधों के दौरे रूके होते हैं । बाकी आधों में दौरे आते हैं, इलाज जारी रहता है । मिर्गी किसी को भी हो सकती है । बच्चा, बडा, बूढा, औरत, आदमी, सब को । दिमाग पर जोर पडने से मिर्गी नहीं होती । कई लोग खूब दिमागी काम करते हैं परन्तु स्वस्थ रहते हैं । मानसिक तनाव या टेंशन से मिर्गी नहीं होती है । अच्छे भले, हंसते-गाते, खुश मिजाज इंसान को भी मिर्ग हो सकती है । मेहनत करने और थकने से मिर्गी नहीं होती । आराम करने वाले को भी हो सकती है । कमजोरी या दुबलेपन से मिर्गी नहीं होती । खाते पीते पहलवान को भी हो सकती है । मांस-मछली-अण्डा खाने से मिर्गी नहीं होती । शाकाहारी लोगों को भी उतनी ही मिर्गी होती है ।मिर्गी एक शारीरिक रोग है । यह ऊपरी हवा का असर नहीं है । मिर्गी का कारण है दिमाग में कोई खराबी आ जाना । दिमाग में खराबी आने से बहुत से कारण होते हैं । इनमें से कोई भी कारण मिर्गी पैदा कर सकता है । दिमाग में आने वाली गडबडी को इलाज द्वारा ठीक किया जा सकता है । यदि वह गडबडी पूरी तरह न मिटे तो भी इलाज द्वारा दौरे रोके जा सकते हैं । दिमाग में खराबी आने का मतलब पागलपन नहीं है । मिर्गी और पागलपन का आपस में कोई रिश्ता नहीं है । दौरे का हाल सुनकर या देखकर मिर्गी होने का पता लगाया जा सकता है । देखने वाले को चाहिये कि वह घटना का हूबहू बयान करे । ठीक-ठीक बताए कि मरीज की क्या हालत थी । क्या वह गिर पडा था ? बेहोश हो गया था ? हाथ-पैर, मुंह, जीभ, दांत, आंख आदि की क्या अवस्था थी ? दौरा कितनी देर चला था ? बाद में मरीज को कैसा लग रहा था ? सही-सही वर्णन सुनकर डॉक्टर फैसला कर सकता है कि मिर्गी है या नहीं। और कोई तरीका नहीं है। मशीनों की जांच से कभी-कभी मदद मिलती है। पर अंतिम फैसला मशीन का नहीं होता । यदि दौरे का वर्णन ठीक से न मिले तो सही डायग्नोसिस (निदान) नहीं हो पाता । यदि दौरे का जोर कम हो तो सारे लक्षण मौजूद नहीं रहते । पहचान में भूल हो सकती है । मिर्गी के कुछ खास प्रकार के दौरे के लक्षण अजीब होते हैं । बहुत से डाक्टर नहीं जानते कि ऐसी भी मिर्गी हो सकती है । दूसरी अनेक अवस्थाएं हैं जो ऊपरी तौर पर मिर्गी से मिलती हैं । पर वे मिर्गी से अलग हैं । जैसे गश, मूर्च्छा, चक्कर, लकवा, मानसिक तनाव के दौरे । मिर्गी सिफ एक प्रकार की नहीं होती, उसके बहुत सारे रूप होते हैं । अधिकतर लोग जिस रूप को जानते हैं उसे बडा दौरा कहते हैं । बडे दौरे में मरीज गिर सकता है, चीख निकलती है, बेहोशी आती है, आंखे ऊपर की ओर मुड जाती है, दांत चिपक जाते हैं, मुंह से फेस या झाग आता है । जीभ कट सकती है, हाथ पैर अकड जाते हैं व झटके आते हैं, पेशाब छूट सकती है । होश आने के बाद थोडी देर थकान, दर्द व सुस्ती रहती है । मिर्गी के छोटे दौरे के बारे में लोग कम जानते हैं । इनके अनेक प्रकार होते हैं । बेहोशी आती है । हाथ पैर में जकडन व झटके नहीं आते । जैसे ही मिर्गी का शक हो, तुरन्त डाक्टर के पास जाएं । यदि डाक्टर को लगे की मिर्गी हो सकती है तो बेहतर होगा कि जल्दी इलाज शुरू कर दें । बाद में मालूम पडे कि मिर्गी नहीं थी तो डाक्टर की सलाह से इलाज बंद कर सकते हैं । मिर्गी रोकने की गोलियाँ खाने में शर्म की क्या बात ? मिर्गी रोकने की गोलियाँ खाने में दुःख की क्या बात ? दौरे जितनी जल्दी रुक जाएं, उतना अच्छा । ज्यादा दौरे आने से आगे चलकर और ज्यादा दौरे आते हैं । ज्यादा दौरे आने के बाद गोलियों का असर कम पड जाता है । मिर्गी की इलाज में चार या पांच खास दवाईयाँ हैं । सभी अच्छी हैं । कोई एक दवा चुनते समय डाक्टर इस बात पर ध्यान देते हैं कि कौन से प्रकार का दौरा आता है । एक समय में एक ही किस्म की औषधि का उपयोग करना चाहिये । दवाई का पूरा असर आने में कई दिन लग सकते हैं । इस बीच यदि दौरे आ जायें तो धीरज रखें । दवाई लेते-लेते भी दौरे आ सकते हैं । हो सकता है कि रोज की खुराक कम पड रही हो । दैनिक खुराक रोज-रोज लेने पर दौरे रुकेंगे, यह पहले से नहीं जान सकते । इस बीच यदि दौरे आ जाएं तो भी डाक्टर पर भरोसा बनाए रखें । दवाईयों द्वारा ज्यादातर मरीजों के दौरे रुक जाते हैं । परन्तु रोज लेना जरूरी है । एक भी दिन की चूक नहीं होना चाहिये । जैसे रोज रोटी खाते हैं, वैसे रोज गोली लें । इलाज लम्बा चलता है । दो साल, चार साल, पांच साल या और भी अधिक । पहले से नहीं बता सकते कि कितने साल चलेगा । कम से कम तीन, चार साल तक दौरे रूक जाना चाहिये । उसके बाद दवाई छूट सकती है । यदि बीच-बीच में दौरे आते रहें तो गोली नहीं छूट सकती । दौरे रुकना जरूरी हैं । जो मरीज नियम से बिना नागा गोली लेते हैं उनमें से ज्यादातर के दौरे रूक जाते हैं और बाद में गोली छूट जाती हैं । मिर्गी के इलाज में शार्ट-कट नहीं है । इलाज लम्बा है । धीरज रखना पडता है । ऐसी दवा नहीं बनी जो थोडे से दिन में बीमारी को जड से मिटा दे । सारी दवाईयाँ बिमारी को दबा कर रखती हैं । मिटा नहीं पाती । थोडे से मरीजों में भरपूर इलाज के बाद भी दौरे नहीं रूकते । इन मरीजों में बीमारी का जोर शायद अधिक होता है । इनकी दवाईयाँ नहीं छूट पाती । अनेक साल खाना पडती हैं । कोई सीमा नहीं है । कोई लिमिट नहीं है । शायद जिन्दगी भर खाना पडती हैं । इसी बात में संतोष करो कि इलाज के कारण दौरे कम हो गये, वरना और ज्यादा हो जाते ।सभी दवाईयों के थोडे बहुत बुरे असर हो सकते हैं । किसी मरीज में ये बुरे असर कम होते हैं तो किसी में ज्यादा । पहले से नही बता सकते कि किस मरीज में क्या बुरे असर होंगे । ज्यादातर मरीजों में कोई बुरा असर नहीं होता । थोडे से मरीजों में मामूली किस्म के बुरे असर होते हैं । अधिकांश मरीज इन्हें सह लेते हैं। दवाईयों से फायदा अधिक है और नुकसान कम ।मरीज को दौरा आने की दशा में क्या करें ?मरीज दौरे में बेहोश पडा हो, झटके आ रहे हों तो उसे साफ, नरम जगह पर करवट से लेटाएं सिर के नीचे कपडा या तकिया लगा दें तंग कपडे ढीले कर दें मुंह में जमा लार या थूक को साफ रुमाल से पोंछ दें । इस बात पर गौर करें कि मरीज को चोट तो नहीं लगी । अपनी घडी से समय नोट करें कि दौरा ठीक-ठीक कितनी देर तक चला । हिम्मत बनाए रखें । ये दौरे दिखने में भयानक, पर वास्तव में खतरनाक नहीं होते । दौरे के समय अधिक कुछ करने को नहीं होता । वह अपने आप कुछ मिनटों में समाप्त हो जाता है । उसे जितना समय लगना है, लगेगा । हमें कुछ नहीं करना चाहिये ।जूते नहीं सुंघाना, प्याज नहीं सुंघाना । ये गन्दे अंधविश्वास हैं । बदबू व किटाणू फैलाते हैं । हाथ पांव नहीं दबाना । हथेली व पंजे की मालिश नहीं करना । दबाने से दौरा नहीं रुकता । चोट व रगड लगने का डर रहता है । मुंह में कुछ नहीं फंसाना । न कपडा, न चम्मच जीभ यदि दांतों के बीच फंसी हो तो उसे अंगुली से अंदर कर दें । मुंह पर पानी के छींटे न डालें । चिल्लाएं नहीं । घबराएं नहीं ।सामान्य खाना खा सकते हैं । भोजन का परहेज नहीं रखना चाहिये । व्रत, उपवास, रोजे रखने से कुछ मरीजों में दौरे बढ जाते हैं । इनसे बचना चाहिये । अन्न न लेना हो तो दूध या फलाहार द्वारा पेट भरा रखना चाहिये । मिर्गी से पीडत व्यत्ति* की शादी हो सकती है । वे बच्चे पैदा कर सकते हैं । बच्चे स्वस्थ होंगे या उन्हें मिर्गी होने का ज्यादा डर नहीं । गर्भवती महिला को दौरे रोकने की गोलियाँ खाते रहना चाहिये । इन गोलियों से ज्यादातर मामलों में बुरा असर नहीं पडता । गोलियाँ खाने वाली महिला बच्चे को दूध पिला सकती है । शादी करने से मिर्गी की बीमारी ठीक नहीं होती । उसके लिये गोलियाँ खाना जरूरी है । मिर्गी खानदानी बीमारी नहीं है बहुत थोडे से मामलों में इसका खानदानी असर देखा जाता है । यह असर १०० प्रतिशत नहीं होता, अधूरा होता है । डाक्टरी ज्ञान के द्वारा पहचान सकते हैं कि किस मरीज में थोडा बहुत खानदानी असर हो सकता है । ९० प्रतिशत मामलों में खानदानी असर नहीं होता ।इस बारे में नहीं सोचना चाहिये, चिन्ता नहीं करना चाहिये ।मिर्गी के अधिकांश मरीजों का दिमाग अच्छा होता है । अनेक मरीज बुद्धिमान व चतुर होते हैं । लगभग सभी मरीज सयाने व समझदार होते हैं । पागलपन व दिमागी गडबडयां बहुत थोडे मरीजों में देखी जाती हैं ।मिर्गी वाले ज्यादातर बच्चे आम स्कूलों में भलीभांति पढते हैं । बहुत थोडे से मरीजों में दिमाग कमजोर हो सकता है । स्वभाव गडबड हो सकता है खासतौर से उनमें - जिनके दौरे न रूके हों । जिनके बीमारी का जोर ज्यादा हो । जिनहें ज्यादा गोलियाँ रोज खाना पडती हों । जिनके मस्तिष्क की जांच में खराबियाँ पाई गई हों । जिन्हें लम्बे समय से , कम उम्र से दौरे आते हों ।कमजोर दिमाग वाले बच्चों के लिये चाहिये स्पेश्यल टीचर व स्कूल । अपने देश में कम मिलते हैं । मिर्गी की बीमारी के कारण दिमाग कमजोर नहीं होता । दौरे रोकने की गोलियों के कारण दिमाग कमजोर नहीं होता । दिमाग कमजोर हो सकता है उसमें पहले से मौजूद बीमारी के कारण । वह बीमारी जिसने मिर्गी रोग को जन्म दिया, वही बीमारी दिमाग को भी कमजोर बना सकती है ।मिर्गी के मरीजों का दिल दुःखाने वाली बातें कौन सी होती है ? लोगों की बेरूखी, बदली हुई नजरें लांछन अकेलापन, दोस्ती की कमी बेमतलब की रोकटोक, जरूरत से ज्यादा सम्हालना, शादी में अडचन व नौकरी छूट जाना । बच्चों में पढाई छूट जाना । छुआ छूत का बरताव । ये सारा माहौल गलत है । बदलना चाहिये । इसी माहौल के कारण मरीज के मन में उदासी, सुस्ती, हीन भावना, डर, चिड-चिडापन आदि पैदा हो जाते हैं ।

12 टिप्‍पणियां:

आलोक ने कहा…

अपूर्व जी यदि आप अपने लेख को अनुच्छेदों में बाँटें तो काफ़ी पठनीय हो जाएगा - आमतौर पर सरसरी निगाह से देखने वाले लोग बड़े लेखों के ज़रूरी अंश खोजते हैं अतः प्रसंग बदलने पर नया अनुच्छेद शुरू करना अच्छा रहेगा।

साथ ही पूर्णविराम के बाद में एक खाली जगह छोड़ें, पहल नहीं। ऐसें। ऐसे नहीं । आशा है आप को मेरे सुझाव बुरे नहीं लगे होंगे। आप चाहें तो टिप्पणी पढ़ कर मिटा सकते हैं।

सेहत चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। उसी के जरिए आप तक पहुँचा।

संजय तिवारी ने कहा…

बहुत अच्छा है आपका यह प्रयास. चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.

Raviratlami ने कहा…

अपूर्व जी, मेरे विचार में इस प्लेटफ़ॉर्म पर लगातार अपनी सामग्री डालते रहें तो उत्तम ही रहेगा.

Raviratlami ने कहा…

लोगों को भूत चढ़ना या देवी आना के बारे में भी विस्तार से बताएं. कारण और निदान दोनों ही.

Unknown ने कहा…

मुझे पहली बार दौरा पड़ा था पर सिटी स्कैन और ब्लड टेस्ट रिपोर्ट्स नार्मल आई हैं पर मुझे कुछ याद नही की मेरे साथ क्या हुआ था और डॉक्टर ने कहा की नींद पूरी नहीं हुई इसलिए ऐसा हुआ पर दवाइयां दौरे की भी दी हुई हैं और नींद की भी दी हुई हैं ! मुझे कुछ समझ नही आ रहा

alok jain ने कहा…

सर,क्या मै आपसे मिल सकता हूँ, आपका एड्रेस
और मोबाइल नम्बर ?????

मै पन्ना से आलोक जैन 9893469025 W

tarun singh ने कहा…

क्या बुख़ार में शरीर ऐठना बेहोश हो जाना यानि मिर्गी के तरह दौड़ा पड़ने से क्या ये समझना चाहिए की मिर्गी है। ct scan में डॉक्टर के अनुसार सब ठीक है, डॉक्टर ककेहना है की MRI कराओ। क्या MRI-Brain से वास्तविकता में पता चल सकता है की मिर्गी है अथवा कोई अन्य परेशानी है। या फिर इलाज केवल अंदाज़े पर चलता रहेगा। और एक बात और यहकि एक बार दौड़ा पड़ा और इलाज अंदाजे पर चलता रहा और 4-5 साल में फिर दौड़ा पड़ता है तो कैसे पता चलेगा की इलाज सही हो रहा है की नहीं। हम तो केवल डॉक्टर्स पर depend है।

Dinesh ने कहा…

Hello Sir,
I request to sir kindly Give a your Contact Number Or Email Id Where I Ask my query ..I Need your Help sir please.

Unknown ने कहा…

Sir मेरे पिता की उम्र 67 साल है 2 दिन पहले उन्हें चक्कर की शिकायत हुई और bp 180 तक जा पहुचा जबकि पहले उन्हें बाप की शिकायत नही थी हॉ टाइप 2 डाइबिटिक जरूर थे,
उस रात सब ठीक हो गया डॉक्टर ने गैस की संभावना जताई 2 दी बाद उन्हें अचानक एक झटका आया जिसमे उनके आंख खुल गए सरीर अकड़ गया पर कुछ देर में नार्मल हो गए ct स्केन कर कर डॉक्टर ने बताया कि पूर्ण क्लोटिंग है और ये मिर्गी की तहर की बीमारी है ।।
क्या मिर्गी पुराने क्लोटिंग की वजह से हो सकती है

Unknown ने कहा…

Sir meri 6day ki bachhi hai usse jhatke
Aa rahe hai kyA karu

Unknown ने कहा…

सर मेरी बेटी 8 साल की है स्कुल जाती है अचानक उसका सर घुमाता है उसके बाद बेहोश हो जाता है 4.5 बार ऐसे दौरे आने के बाद डक्टर के पास ले गया तो MRI test siklin test xsre our taifaed check करने के बाद मस्तीस्क सुजन है जो मृगी के लच्क्षण है कहा और 15 दीन का दवाई दिया उसके बाद17 दीन ठीक रहा और फीर सर घुम रहा है कहा और बेहोश हो गया क्या करूं सर सलाह बादताइये।

Entertainment India ने कहा…

सर रोगी की उम्र 35 साल (महिला)
6 महीने पहले बिजली की तार से करंट लग गया था
उसके बाद से दिन में 2 बार शरीर शिथिल पढ़ जाता है और मुँह से झाग निकलने लगता है 20 से 25 मिनट तक
उसके बाद ठीक हो जाता है लेकिन सर एकदम भारी लगता है । नुरोलिस्ट से दिखाया तो बोला दिमाग के नस में प्रॉब्लम हो गया है लेकिन इलाज कराने के बाद भी अभी भी ठीक नहीं हो रहा है