शुक्रवार, 27 मार्च 2009

वाचाघात/ अफे.जिया/ अवाग्मिता/ बोली का लकवा

मनुष्य एक वाचाल प्राणी है। संवाद व सन्देश हेतु भाषा या बोली का उपयोग कर पाना उसकी खास पहचान हैजो उसे अन्य उच्च् प्राणियों (प्राईमेट्स, एप्स) से अलग करती है। इस गुण को सीखने हेतु ऊर्वर जमीन या हार्डवेयर हमारे मस्तिष्क में जन्म से विद्यमान रहता है। घर और बाहर की दुनिया में व्याप्त बातचीत की ध्वनियों के बीज इस जमीन पर बरसते हैं। बच्चा उन्हें सुनता है, दोहराता है। सुने गये ध्वनि समूहों का देखे गये दृश्यों से मिलान करता है। बहुत तेजी से एक जटिल साफ्टवेयर का कोड तैयार होने लगता है। भाषा रूप इस प्रोग्राम में ध्वनियाँ (फोनोलॉजी) हैं, शब्द हैं (लेक्सिकान) उनके अर्थ तथा दूसरे शब्दों से उनके अन्तर सम्बन्ध या रिश्ते हैं (सिमेन्टिक्स) शब्दों की लड़ी को वाक्यों की माला में सही क्रम से पिरोने के लिये व्याकरण के नियम हैं (सिन्टेक्स) शब्दों के रूप को परिवर्तित करने की प्रणालियाँ हैं (मॉर्फोलॉजी), अनेक वाक्यों को गूँथ कर लम्बे कथोपथन को गढ़ने का कौशल (डिस्कोर्स) है, कब, कहाँ, क्यों, क्या और कैसे कहना इसकी समझ (प्रेग्मेटिक्स) है। मस्तिष्क रूपी सुपर कम्प्यूटर में इस महान साफ्टवेयर का मूलभूत कामकाजी ढांचा जीवन के प्रथम तीन वर्षों में तैयार हो जाता है। किसी प्रशिक्षण की जरूरत नहीं पड़ती। अपने आप होता है। बस पानी में फेंक दो, स्वतः तैरना आ जाता है। परन्तु यदि पानी में न फेंका जावे तो तैरना सीख पाने की उर्वर क्षमता पांच छः सालों में मुरझा जाती है। भेड़िया - बालक रामू का किस्सा सुना होगा। वह कभी बोलना न सीख पाया। बचपन से सालों में उसने इन्सानी बोली सुनी ही नहीं । अवाग्मिता (अफेजिया) में व्यक्ति, जो अच्छा भला बोलता सुनता-लिखता-पढ़ता था, अपनी भाषागत क्षमता पूरी तरह या आंशिक रूप से खो बैठता है।
यह एक न्यूरालॉजिकल अवस्था है जिसमें मस्तिष्क के गोलार्ध में रोग विकृति के कारण भाषा और वाणी के द्वारा संवाद करने की योग्यता में कमी आती है। मस्तिष्क में आने वाली विकृति कुछ खास हिस्सों में अधिक पाई जाती है, हर कहीं या सब जगह नहीं होती। इसके लिये बायें गोलार्ध के फ्रान्टल खण्ड में ब्रोका-क्षेत्र और टेम्पोरल खण्ड में वर्निकि क्षेत्र अधिक जिम्मेदार होते हैं। इन्हें वाणी केन्द्र (स्पीच सेन्टर) कहा जाता है। इन इलाकों में किसी भी किस्म की व्याधि अफे.जिया (वाचाघात) पैदा कर सकती है। अधिकांश मरीजों में यह व्याधि लकवा (पक्षाघात, स्ट्रोक) के रूप में आती है। मस्तिष्क में खून पहुंचाने वाली नलिकाओं (प्रायः धमनियों) में खून जमजाने और रक्तप्रवाह अवरुद्ध होने से, उसका एक हिस्सा काम करना बन्द कर देता है और मर जाता है। कभी-कभी धमनी (आर्टरी) के फट पड़ने से रक्तस्त्राव होता है तथा मिलते-जुलते लक्षण पैदा होते हैं। (
स्ट्रोक के अलावा अवाग्मिता के अन्य कारण हैं - सिर की गम्भीर चोट, मस्तिष्क में टूमर या गांठ, मस्तिष्क में संक्रमण या इन्फेक्शन जैसे कि मेनिन्जाईटिस या एन्सेफेलाइटिस, मस्तिष्क की क्षयकारी बीमारियाँ।
अफेजिया (वाचाघात) के लक्षण
इसकी शुरुआत प्रायः अचानक होती है और शरीर के आधे भाग (दायें हाथ तथा दायें पैर) के लकवे के साथ होती है।
वाकपटुता में कमी - बोली अटकती है। शब्द याद नहीं आते। धाराप्रवाह वाणी नहीं रह जाती है। तीव्र अवस्था में मरीज लगभग गूंगा या मूक हो जाता है। आ-आ, ओ-ओ, जैसे स्वर-मात्र निकल पाते हैं। मुंडी हिला कर या हाथ के इशारे से समझाने की, कहने की कोशिश करता है। अर्थवान या निरर्थक इक्का दुक्का शब्द या ध्वनि संकुल के सहारे अपनी बात बताने का प्रयास करता है। उदाहरण के लिये एक मरीज पैसा... पैसा... तथा दूसरा एओ... एओ... शब्द या ध्वनि में उतार-चढ़ाव के द्वारा समझाने की कोशिश करते थे। सामान्य व्यक्ति भी कभी-कभी कहता है - शब्द मेरी जुबान पर आकर अटक गया - टिप ऑफ टंग प्रसंग। अफेजिया में ऐसा हमेशा होता है। सही लफज न मिल पाने पर कुछ मरीज घुमा फिरा कर अपनी बात कहते हैं। उदाहरण के लिये तौलिया मांगते समय कहना कि अरे वो... वो... क्या कहते हैं ... उसे वह.. कपड़ा.. बदन... पोंछना...

3 टिप्‍पणियां:

Sudesh kumar ने कहा…

My son namely (age 01 year 10 months) suffering paralyses (Lakwa), when he was 05 months he fall in fever. After that he admitted in Saroj Hospital, Rohini, New Delhi. He was in coma and admitted 14 days in Saroj Hospital. He undergone treatment of Pediatric Neurologist of AIIMS hospital, New Delhi and physiotherapy treatment are also provided by AIIMS Hospital, New Delhi. Presently, his left hand and left leg is not working properly.

sudesh kumar ने कहा…

My son namely (age 01 year 10 months) suffering paralyses (Lakwa), when he was 05 months he fall in fever. After that he admitted in Saroj Hospital, Rohini, New Delhi. He was in coma and admitted 14 days in Saroj Hospital. He undergone treatment of Pediatric Neurologist of AIIMS hospital, New Delhi and physiotherapy treatment are also provided by AIIMS Hospital, New Delhi. Presently, his left hand and left leg is not working properly.

e-mail address : bhargawa16@yahoo.com

manish gupta ने कहा…

क्या दाऐ अंग के लकवा होने पर वाचाघात सही हो सकता है।इसके उपाय क्या है